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अहिंसावादी कौन ? गाँधी या आंबेडकर

Jul 19, 2020

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अहिंसावादी कौन ? गाँधी या आंबेडकर
यह घटना सन 2002 की है | घटना इस प्रकार है कि उन दिनों में नई दिल्ली चाणक्यपुरी से एक जैन टीवी का प्रसारण होता था जिसके तहत सप्ताह में एक वार दलित आवाज़ नाम के कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता था | उन दिनों इस प्रोग्राम का एंकर मैं होता था | मेरी टीम में रुमाल सिंह हरित तथा डॉ गौतम होते थे | घटना वाला दिवस गाँधी जयंती अर्थात 2 अक्टूबर था | 
घटना का विवरण इस प्रकार है, कि एक दलित आवाज़ प्रोग्राम देखने वाले शख्स ने स्टूडियो में फोन लगाया और गाँधी के अहिंसावादी होने वाले के सत्य को जानना चाहा | उस पर प्रतिक्रिया करते हुए डॉ गौतम ने कम्युनल अवार्ड की घटना की चर्चा करना चाहा और हम तीनो ने कम्युनल अवार्ड और गाँधी पर विस्तार से चर्चा की और अंत में हम इसी निर्णय पर पहुंचे कि गाँधी जी ब्रिटिश सरकार द्वारा आघोषित कम्युनल अवार्ड जिस से भारत के अनुसूचित जाती के लोगों की भलाई होनी थी के विरोध में आत्म हत्या करने पर उतारू हो गए | जो शख्स आत्म हत्या का सोच सकता है वह अहिंसावादी कैसे हो सकता है ? इस प्रकरण में अहिंसावादी तो अम्बेडकर नज़र आ रहे है जिन्होंने गाँधी जी की जान बचाने के लिए अपने मिशन से भी समझौता कर लिया और कम्युनल अवार्ड को त्याग कर गाँधी जी की जान बचाई | 
इस निर्णय को जैन टीवी स्वीकार नहीं कर पाया और उस ने हम लोगों को इस टीवी प्रोग्राम से हटा कर एक धोतीधारी ब्राह्मण को लगा लिया | अब आप स्वं ही सोचिये कि कम्युनल अवार्ड की टकसाल पर कौन सच्चा अहिंसावादी उतरता है |  जे जे सिंह 

अहिंसावादी कौन ? गाँधी या आंबेडकर

यह घटना सन 2002 की है | घटना इस प्रकार है कि उन दिनों में नई दिल्ली चाणक्यपुरी से एक जैन टीवी का प्रसारण होता था जिसके तहत सप्ताह में एक वार दलित आवाज़ नाम के कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता था | उन दिनों इस प्रोग्राम का एंकर मैं होता था | मेरी टीम में रुमाल सिंह हरित तथा डॉ गौतम होते थे | घटना वाला दिवस गाँधी जयंती अर्थात 2 अक्टूबर था | 

घटना का विवरण इस प्रकार है, कि एक दलित आवाज़ प्रोग्राम देखने वाले शख्स ने स्टूडियो में फोन लगाया और गाँधी के अहिंसावादी होने वाले के सत्य को जानना चाहा | उस पर प्रतिक्रिया करते हुए डॉ गौतम ने कम्युनल अवार्ड की घटना की चर्चा करना चाहा और हम तीनो ने कम्युनल अवार्ड और गाँधी पर विस्तार से चर्चा की और अंत में हम इसी निर्णय पर पहुंचे कि गाँधी जी ब्रिटिश सरकार द्वारा आघोषित कम्युनल अवार्ड जिस से भारत के अनुसूचित जाती के लोगों की भलाई होनी थी के विरोध में आत्म हत्या करने पर उतारू हो गए | जो शख्स आत्म हत्या का सोच सकता है वह अहिंसावादी कैसे हो सकता है ? इस प्रकरण में अहिंसावादी तो अम्बेडकर नज़र आ रहे है जिन्होंने गाँधी जी की जान बचाने के लिए अपने मिशन से भी समझौता कर लिया और कम्युनल अवार्ड को त्याग कर गाँधी जी की जान बचाई | 

इस निर्णय को जैन टीवी स्वीकार नहीं कर पाया और उस ने हम लोगों को इस टीवी प्रोग्राम से हटा कर एक धोतीधारी ब्राह्मण को लगा लिया | अब आप स्वं ही सोचिये कि कम्युनल अवार्ड की टकसाल पर कौन सच्चा अहिंसावादी उतरता है |  जे जे सिंह 

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