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यीशु के जन्म की विधि जिस से वह पवित्र ठहरे

Jul 24, 2020

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यीशु के जन्म की विधि जिस से वह पवित्र ठहरे

क्योंकि यीशु जगत के पापियों के पापों का बोझ अपने ऊपर उठाने इस जगत में आया था तो उस के लहू की पवित्रता अनिवार्य थी | यदि वह आदम के श्रापित लहू से जन्मा होता तो वह हम पापियों के गुनाह अपने ऊपर उठाने के योग्य नहीं ठहरता कियोंकि पापी पुरुष को पाप की कीमतअदा करने का कोई अधिकार नहीं | जिस का विशेष कारण है कि वह पहिले से ही मृत्यु के अधिकार में होता तो हमारी मृत्यु का बोझ कैसे उठाता | इस वजह से यीशु के लहू का पवित्र होना अनिवार्य था |

जब यीशु स्लीव पर मरा पर उस समय उस ने हमारे पापों के बोझ को उठा रखा था |

इस के पहिले जब उस ने तीन वार प्रार्थना की कि पिता यह प्याला टाल दे पर फिर भी मेरी  नहीं पर तेरी ही इच्छा पूरी हो उस प्रार्थना में यीशु पिता से बिछड़ने के दुःख की बात कर रहा था |

"हे मेरे पिता, यदि यह प्याला मेरे पीए बिना नहीं हट सकता तो तेरी इच्छा पूरी हो"। (मति 26:42)

और अंत में जब वह स्लीव पर था तो पिता ने उसे छोड़ दिया तो ;

तीसरे पहर के निकट यीशु ने बड़े शब्द से पुकार कर कहा, एली, एली, लमा शबक्तनी अर्थात हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया? (मति 27:46) 

विशेष विधि से उसका जन्म हुआ

बहुत से लोगों की सोच है मरियम ने डिम्ब का योगदान दिया और पवित्र आत्मा द्वारा शुक्राणु दिया गया और जिस से दोनों के मिलाप से मरियम का गर्भ ठहरा | इस रीति से मरियम द्वारा गर्भधारण हुआ होता तो उस में परमेश्वर का लहू और आदम का लहू दोनों का मिश्रण अनिवार्य था |

  1. इस विधि से परमेश्वर की पापी मनुष्य के लिए छुटकारे की योजना अवश्य ही असफल हो जाती |
  2. इस के अतिरिक्त इस विधि में यह मान्यता इस आधार पर स्थिर है कि मरियम के गर्भधारण से पहिले यीशु किसी भी रूप में विध्यमान नहीं था |

यह सत्य है कि परमेश्वर पवित्र बाइबिल में कहता है कि पुत्र के लिए पिता ने एक शरीर त्यार किया | और पिता ने पुत्र के लिए मरियम की कोख में वह शरीर त्यार किया था |

"वह जगत में आते समय कहता है, कि बलिदान और भेंट तू ने न चाही, पर मेरे लिये एक देह तैयार किया "। (इब्रानियाँ 10:5)

यीशु अपने बैथेलहम में जन्म से पहिले ही यह सत्य को जानता था कि पिता ने उस के लिए एक शरीर त्यार किया है जिसे वह बाद में परमेश्वर का मंदिर कहता है | इस में यीशु केवल स्वर्ग से आकर सीधा मरियम की कोख में बनाये गए शरीर में विराजमान हुआ | 

यीशु के शरीर में मरियम के लहू का जो आदम से था का कोई मिश्रण नहीं हुआ और इस विधि से यीशु के लहू में आदम के लहू का कोई संबन्ध नहीं बन पाता और यीशु पिता का ग्रहण किया हुआ पुत्र है अर्थात यीशु उस के पहिले भी होंद में था |

शब्द देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। (यूहन्ना 1:14)

इस प्रकार यीशु का शरीर अद्भुत रीति से मरियम की कोख में पनपने लगा | यीशु पिता से पवित्र आत्मा के माध्यम से सीधा मरियम की कोख में आया और समय पूरा होने पर शिशु के रूप में मरियम से जन्मा | जीवन अर्थात लहू जो यीशु की रगों में बहता था वह पिता परमेश्वर से ही था | याद करो यीशु ने कहा था, "मैं जीवन हूँ" वह स्वं जीवन का कर्ता था |

'मरियम ने कहा, मेरा प्राण प्रभु की बड़ाई करता है। 47 और मेरी आत्मा मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर से आनन्दित हुई। 48 क्योंकि उस ने अपनी दासी की दीनता पर दृष्टि की है, इसलिये देखो, अब से सब युग युग के लोग मुझे धन्य कहेंगे'। (लुका 1:46-48)

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